Thursday, 5 January 2017

जाने कौन जन्म का नाता

तुझ से जाने कौन जन्म का नाता,
बहुत सोचा मैं पर समझ न पाता।
कभी माँ बन मेरे सपनों में आवें,
और कभी बेटी बन हुक्म चलावें !
कभी बड़ी बहन बन मेरे आंसूं पोंछें,
कभी छोटी बहना की जिद के झोंके !
और कभी मेरा मकान तू घर बनावें
सांसें मेरी सब सन्दल सी महकाएं !
पर ये तो सब हैं सपनों की बातें
गुपचुप राज़ भरी अपनों की बातें !
राज़ मेरे सब तुझ पर ज़ाहिर,
मुश्किल रु-ब-रु, फिर भी हाज़िर !
सच चाहे मैं हरगिज़ न मानूं,
पर तू जाने है , यह मैं जानूँ !
आस ना कोई, फिर भी ख़ास
नेह की बारिश, नेह की प्यास !
और सच में तू जैसी है, वैसी ही रहना
फिर चाहे मत मुझे अपना कहना !
बस कभी कभी मेरे सपनों में आना
आ कर मुझे तुम अपना बताना !
-- अमर
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