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पुण्य-पाप
दिन-रात,
धूप-छांव,
सांझ-सबेरा,
काया-छाया,
आकाश-पताल,
सुख-दुःख,
मिलना-बिछड़ना,
उल्फत-नफरत,
सफ़ेद-स्याह,
सच-झूठ,
ख़ुशी-ग़म,
हँसना-रोना,
सही-ग़लत,
आबाद-बरबाद,
क़ातिल-मक़तूल,
ये सब.....ऐसे जैसे
तू और मैं !
-- अमर
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वाह !
ReplyDeleteअभी तक आग जल रही है.