कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं,
तो कह देना कोई ख़ास नहीं,
एक दोस्त है कच्चा-पक्का सा,
जज़्बात को ढांपे इक पर्दा सा,
बस ! इक बहाना...अच्छा सा !
जो रूह के साथ अहसास भी है,
वो दूर भी है और पास भी है,
और पास रह कर भी पास नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं.
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
सच क्या है, दिलों को पता है,
तुझे पता है, मुझे पता है,
दुनिया को अहसास नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
इक नाज़ुक से रिश्ते का नाता,
फूल-पांखुरी, ओस का नाता,
खुद-गरजी की आस नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
बिजली बसी रूह बादल के,
वैसे तुम मेरे मन-आन्गन मे,
जिस्मो की दरकार नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
दर्द तेरे मै सारे पी कर,
गाऊ गीत नया जब प्रियतम,
फ़न रहू मै, फ़नकार तू ही,
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
मिलना- बिछुड़ना रीत पुरानी,
वक़्त दोहराए शायद यही कहानी,
पर संग छूटेगा, साथ नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
मेरे नक्श पे तेरा साया
मन्ज़िल मेरी, सफ़र पराया
कोई काफ़िला साथ नहीं
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
मन मे ख्वाब सजाये रखना,
साथ के दीप जलाये रखना,
फ़िर चाहे हाथ मे हाथ नही.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
तुम मेरे सपनो मे आना,
मुझ को तुम ख्वाबो मे पाना,
विरह सी कोई बात नही.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
इस जन्म तो यही कहानी,
हो इक अगले जन्म, राजा-रानी,
प्यार रहे फ़िर प्यास नही.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
एक दोस्त है कच्चा-पक्का सा,
जज़्बात को ढांपे इक पर्दा सा,
बस ! इक बहाना...अच्छा सा !
- अमर
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं,
तो कह देना कोई ख़ास नहीं,
एक दोस्त है कच्चा-पक्का सा,
जज़्बात को ढांपे इक पर्दा सा,
बस ! इक बहाना...अच्छा सा !
जो रूह के साथ अहसास भी है,
वो दूर भी है और पास भी है,
और पास रह कर भी पास नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं.
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
सच क्या है, दिलों को पता है,
तुझे पता है, मुझे पता है,
दुनिया को अहसास नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
इक नाज़ुक से रिश्ते का नाता,
फूल-पांखुरी, ओस का नाता,
खुद-गरजी की आस नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
बिजली बसी रूह बादल के,
वैसे तुम मेरे मन-आन्गन मे,
जिस्मो की दरकार नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
दर्द तेरे मै सारे पी कर,
गाऊ गीत नया जब प्रियतम,
फ़न रहू मै, फ़नकार तू ही,
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
मिलना- बिछुड़ना रीत पुरानी,
वक़्त दोहराए शायद यही कहानी,
पर संग छूटेगा, साथ नहीं.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
मेरे नक्श पे तेरा साया
मन्ज़िल मेरी, सफ़र पराया
कोई काफ़िला साथ नहीं
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
मन मे ख्वाब सजाये रखना,
साथ के दीप जलाये रखना,
फ़िर चाहे हाथ मे हाथ नही.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
तुम मेरे सपनो मे आना,
मुझ को तुम ख्वाबो मे पाना,
विरह सी कोई बात नही.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
इस जन्म तो यही कहानी,
हो इक अगले जन्म, राजा-रानी,
प्यार रहे फ़िर प्यास नही.
कोई तुम से पूछे गर, कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई ख़ास नहीं !
एक दोस्त है कच्चा-पक्का सा,
जज़्बात को ढांपे इक पर्दा सा,
बस ! इक बहाना...अच्छा सा !
- अमर
No comments:
Post a Comment