Wednesday, 24 October 2012


ज़िन्दगी सोचो तो मौत की मेहेरबानी है
वो ऐसे के ये तो आनी जानी है

दिल की धड़कने तो कभी कभी सुनते हैं
सांस रुक जाना तो रोज़ की कहानी है 

उजाला तभी होता है जब कोई दे 
अँधेरा तो सब जगह पैमानी है

ज़िन्दगी के पीछे भागनेवालों सोचो
मौत तो फिर भी आनी है

आंखी
दिल पे जख्मों के निशाँ क्या गिनें ...... 
गिनते हूए सुबह से लो शाम आ गयी .... 

आंखी

क्या नहीं है
इन घुच्ची आँखों में
इन शातिर निगाहों में
मुझे तो बहुत कुछ
प्रतिफलित लग रहा है!
नफरत की धधकती भट्टियाँ...
प्यार का अनूठा रसायन...
अपूर्व विक्षोभ...
जिज्ञासा की बाल-सुलभ ताजगी...
ठगे जाने की प्रायोगिक सिधाई...
प्रवंचितों के प्रति अथाह ममता...
क्या नहीं झलक रही
इन घुच्ची आँखों से?
हाय, हमें कोई बतलाए तो!
क्या नहीं है
इन घुच्ची आँखों में!
--
नागार्जुन

Wednesday, 10 October 2012

भाई भोजपुरिया




भाई भोजपुरिया हो भाई भोजपुरिया ,


कर ना तुही कुछ जोगार ना त देसवा बिरान हो जाई ,

अठारह स संतावन या उनीस स बेआलिस हो ,

पड़ल बा तहरे दरकार ना त देसवा बेजार हो जाई ,

तोहरे में मंगल पांडे अलख जगावे ले ,

तोहरे में बाबु कुंवर दमवा दिखावे ले ,

अस्सी में आवे ला बाहार जब देसवा से प्यार हो जाई

भाई भोजपुरिया हो भाई भोजपुरिया 
,
कर ना तुही कुछ जोगार ना त देसवा बिरान हो जाई ,

गाँधी जी में ताकत तोहरे से आइल हो ,

गोरान अंग्रेजन के मन घबराइल हो ,

बड़ी जोड़ से बही जब बेयार की दुश्मन के नाश हो जाई ,

जय प्रकाश नारायण के के नइखे जानत हो ,

अइसन बहवाले उ सामाजिक बेयार इमरजेंसी तबाह हो जाई..



Ravi Kumar Giri

Sunday, 7 October 2012


सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा,
हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलगुला हमारा।

बुड्ढे कुंवारियों से नैना लड़ा रहे हैं,
मकबूल माधुरी की पेंटिंग बना रहे हैं,
ऊपर उगी सफेदी भीतर दबा अंगारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

सत्ता के सिंह बकरी की घास खा रहे हैं,
गांधी की लंगोटी का बैनर बना रहे हैं,
चर-चर के खा रहे हैं चरखे का हर किनारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

नारी निकेतन उसके ही बल पे चल रहे हैं,
हर इक गली में छै छै बच्चे उछल रहे हैं,
जिसको समझ रहा है सारा शहर कुंवारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

दंगा कराने वाले गंगा नहा रहे हैं,
चप्पल चुराने वाले मंदिर में जा रहे हैं,
थाने में बंट रहा है चोरी का माल सारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

साहब के संग सेक्रेटरी पिकनिक मना रही हैं,
बीवी जी ड्राइवर संग डिस्को में जा रही हैं,
हसबैण्ड से भी ज्यादा मैडम को टॉमी प्यारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

जो मर्द हैं वो घर में करते हैं मौज देखो,
लालू के घर लगी है बच्चों की फौज देखो,
परिवार नियोजन का किन्नर लगाएं नारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

है छूट लूटने की ए देश लूट खाओ,
लेने में पकड़ जाओ तो देकर के छूट जाओ,
चाहे जहाँ पे थूको, खुलकर बहाओ धारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

कोठे में जो पड़े थे, कोठी में रह रहे हैं,
खुद को शिखंडी सिंह की औलाद कह रहे हैं,
जनता के वास्ते तो मुश्किल है ईंट गारा,
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।

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डा. सुनील जोगी

गुर गोबिन्द सिंह जी को उनके निर्वाण दिवस पर श्रद्धांजली

                         http://ankhikavitasangrah.blogspot.in/
"अंगार दहकते पथ पर भी हम कभी मौत से डरे नही
सो-सौ घाव सहे सीने पर मर कर भी हम मरे नही ।
बारूदी चिंगारी तो क्या दावानल से जले नही
दिवारो मे चुने गये पर धर्म युद्ध से टले नही ।
होड मचेगी फिर भारत के बेटो के बलिदान की
फिर शोणित से लिखनी होगी गाथा हिन्दुस्तान की ।
उठो हिन्द के वीर वतन की किलकारी मे जोश भरो
धरती अम्बर गूंज उठे वो भीषणतम जय घोष करो ॥

जय हिन्द

via Banaras Ki Galiyan