Monday, 11 March 2013

भले ही मुल्क के हालात में तब्दीलियाँ कम हों,
किसी सूरत गरीबों की मगर अब सिसकियाँ कम हों।

तरक्की ठीक है इसका ये मतलब तो नहीं लेकिन,
धुआँ हो, चिमनियाँ हों, फूल कम हों, तितलियाँ कम हों।

फिसलते ही फिसलते आ गए नाज़ुक मुहाने तक,
ज़रूरी है कि अब आगे से हमसे गल्तियाँ कम हों।

यही जो बेटियाँ हैं ये ही आख़िर कल की माँए हैं,
मिलें मुश्किल से कल माँए न इतनी बेटियाँ कम हों।

दिलों को भी तो अपना काम करने का मिले मौक़ा,
दिमागों ने जो पैदा की है शायद दूरियाँ कम हों।

अगर सचमुच तू दाता है कभी ऐसा भी कर ईश्वर,
तेरी खैरात ज्यादा हो हमारी झोलियाँ कम हों।

Guru Deep
सैयाँ गइलन बिदेस
पहुंचा के सजनी के मन के ठेस

टूटल-फूटल इंग्लिस सीख के,
फोनवा पर झाड़स उपदेश

सूट-बूट आ जूता पहिरस,
रहलन गाँव के गोबर-गनेस

फगुवा फेरु आ गईल,
जोगीरा जहजिया कब लौटी आपन देस ||

जोगीरा सा रा रा रा


सयान बेटवा के मति भईल भ्रष्ट,
घरे मचावे उत्पात
इज्जत माटी में मिला गईल,
सुने ना बडन के बात
उल्टा-सीधा सवाल करे,
समझे अपना के बाप
फगुवा फेरु आ गईल,
जोगीरा भंगवा से होखी इलाज ||
जोगीरा सा रा रा रा,

फागुन महिनवा आ गईल,
सबुनवा लगावे न कोय
रंग के ऊपर रंग चढ़े,
अंग-अंग संग भिगोय
फगुवा फेरु आ गईल,
जोगीरा लगे जैसे जंग होय ||
जोगीरा सा रा रा रा, कबीरा आ रा रा रा.....

पूस-अघन ना हम देखनी,
ना कवनो कार्तिक-कुआर
साल भर में जमा कईनी,
दुसमन दस हजार
कहीं बोली चले कहीं गोली,
सबके लगे हथियार
फगुवा फेरु आ गईल,
जोगीरा दुश्मनो लागे जैसन यार ||
जोगीरा सा रा रा रा
~~@vadhesh~~

Tuesday, 5 March 2013

अशार

गिरे हैं अर्श से फर्श पर ऐसे 
पता नहीं चला ऐसा हुआ कैसे 

आंखी